
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर लखनऊ की धरती आज इतिहास की साक्षी बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बसंतकुंज योजना में बने भव्य राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में डेढ़ लाख से अधिक लोग मौजूद रहे।
“आज लखनऊ में सिर्फ भीड़ नहीं थी, विचारों का सैलाब था।”
तीन विभूतियां, एक विचारधारा
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 65 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमाओं का अनावरण किया।
यह स्थल अब केवल स्मारक नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक प्रेरणा का प्रतीक बनकर उभरा है।
PM Modi का संदेश: हर कदम राष्ट्र निर्माण की ओर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत क्रिसमस की शुभकामनाओं के साथ की और कहा— “आज लखनऊ की यह भूमि एक नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। यह स्थल हमें सिखाता है कि हमारा हर पग राष्ट्र निर्माण की दिशा में होना चाहिए।”
उन्होंने याद दिलाया कि यही स्थान कभी कूड़े का पहाड़ था और आज यह विचारों का शिखर बन गया है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी: निर्णायक नेतृत्व की पहचान
PM मोदी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक देश, एक विधान, एक निशान का संकल्प रखा। आज वही संकल्प कश्मीर में पूर्ण रूप से लागू है। स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिकीकरण की नींव रखी। आज UP में बनता Defence Corridor उसी सोच की आधुनिक तस्वीर है।
दीनदयाल उपाध्याय और अंत्योदय का सपना
प्रधानमंत्री ने कहा— “दीनदयाल जी का अंत्योदय का सपना, आज हमारी प्रतिबद्धता है।”
पक्का घर, शौचालय, नल से जल, गैस कनेक्शन, मुफ्त अनाज और इलाज— ये योजनाएं नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति तक पहुंचा सम्मान हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी: सुशासन का असली अर्थ
25 दिसंबर को सुशासन दिवस बताते हुए मोदी ने कहा—
- टेलीकॉम क्रांति
- ग्रामीण सड़कें
- मेट्रो की शुरुआत
- एक्सप्रेसवे नेटवर्क
ये सब अटल जी की दूरदर्शिता का परिणाम हैं।
“आज की रफ्तार, कल की सोच का नतीजा है।”
CM योगी का संबोधन: “अंधेरा छटेगा, कमल खिलेगा”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा—“श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्थायी स्तंभ हैं।”
उन्होंने अटल जी की पंक्ति दोहराई— “अंधेरा छटेगा, कमल खिलेगा।” और कहा कि आज देश उसी कथन को साकार होते देख रहा है।
क्या है खास राष्ट्र प्रेरणा स्थल में?
- गोमती नदी के किनारे स्थित
- 65 एकड़ में फैला
- लागत: करीब 232 करोड़ रुपये
- विभाजन त्रासदी, जनसंघ–भाजपा यात्रा, भारत माता की प्रतिमा
- अटल, श्यामा प्रसाद और दीनदयाल पर समर्पित विशेष गैलरियां
